शनिवार, 29 दिसंबर 2018

सच परेशान हो सकता है , पराजित नही

सच परेशान हो सकता है , पराजित नही :-

                                                                     ये बात आप सभी जानते है और अनुभव भी किया होगा । 
और हमारे संतो ने भी कहा सांच बराबर तप नही झूठ बराबर पाप जाके हृदय सांच है , ताके हृदय आप अर्थात सच के बराबर कोई दूसरा तप नही है , और झूठ के बराबर दूसरा पाप और जिसके ह्रदय मे सच्चाई है , उसके ह्रदय मे स्वंय प्रभु विराजते है । 

लेकिन आज कल की बात करे तो ये दोहा उल्टा हो जाता है , यहा झूठ बराबर तप नही सांच बराबर पाप आज कल प्रत्येक वयक्ति हर क्षण झूठ बोलता है , और जैसा की कहा जाता है जब तक झूठ न बोले तो लोगो की रोटी हजम नही होती । 
और इस मोबाइल ने तो लोगो को झूठ बोलने की और सुविधा दे दी । 

। और एक बात हमे भले ही न सच बोलना आता हो लेकिन दूसरे से यही उम्मीद करते है की वो सच बोले वरना बड़ा गुस्सा आता है । मान लीजिए हमारे घर पर कोई आया और हमारा मिलने का मन नही तो हम बच्चों से या पत्नी से या किसी भी घर के सदस्य से कहलवा देगे की वो अभी घर पर नही है , लेकिन जब कुछ समय बाद हम किसी काम से घर पर गए और हमे यही जवाब मिले और बाद मे पता चले की वो घर पर ही था तो बड़ा गुस्सा आता है और कहेगे की कितना झूठा है । 
तो कहने का मतलब पूरी कोशिश करे की ज्यादा से ज्यादा सच बोले और एक बात सच बोलने वाले को ज्यादा कुछ याद नही करना पड़ता और झूठ बोलने वाला हमेशा फंसता है इसलिए सच बोले बड़ा आनंद आएगा । 
                           जय श्री राधे 

गुरुवार, 27 दिसंबर 2018

व्यापारी ईमानदारी

व्यापारी ईमानदारी :-

                                     ये दोनो शब्द कितने मिल रहे है , कितना (match) है , लेकिन शब्द तो मिल रहे है , अगर ईमानदारी के अंदर व्यापारी हो जाये या व्यापारी के अंदर ईमानदारी हो जाये तो बहुत बढ़िया हो । 
अच्छा आप सोच रहे होगे ईमानदारी के अंदर व्यापारी ये बात समझ मे नही आयी अरे भाई बात एक ही और फिर भी न समझ आए तो अंदर को अंडर कह लीजिए अब तो समझ आ ही गया । 
कहने का मतलब सिर्फ इतना है कि काम कोई भी हो ईमानदारी से किया जाये तो वो एक सत्कर्म का स्वरूप हो जाता है । 

तो इसलिए कार्य कोई भी हो ईमानदारी से हो तो आप भी प्रसन्न रहेगे और सामने वाला भी प्रसन्न रहेगा । 
        जय श्री राधे 

बुधवार, 26 दिसंबर 2018

कुछ न कुछ सीखते रहो

कुछ न कुछ सीखते रहो :-

                                          हमे सदैव कुछ न कुछ किसी न किसी से सीखते रहना चाहिए । 
लेकिन हमे जो भी सीखना है वो अच्छा सीखना है बुरा नही अपने मतलब का सीखना है , अब ये नही की यहा सीखने की बात कही जा रही है तो आप सोचो कि हा कुछ न कुछ सीखने के लिए कहा गया तो आप किसी को देखकर नशा करना सीख ले , मारना पीटना आदि बुरे काम सीखे नही । 
हमे अच्छी बाते सीखनी है और सिर्फ एक मनुष्य नही किसी भी जीव जन्तु से चाहे वो चीटी हो या मधुमक्खी दत्तात्रेय जी जो भगवान के स्वरूप है उन्होने हमे यही बताया कि हमे सभी से अच्छी बाते सीखनी चाहिएअब आप सोच रहे होगे कि पशु पक्षी से क्या सीखे तो देखिए  चीटी हमे कठिन परिश्रम करना सिखाती है मधुमक्खी परोपकार करना स्वयं मेहनत करके शहद बनाती है और मजे हम लेते है । 
हमारे राष्ट्र पिता महात्मा गांधी जी को एक वयक्ति ने पत्र दिया और उसमे गाली ही गाली लिखी थी बापू ने उस पत्र को बड़े ध्यान से पढ़ा और उनके पास रहने वाले वयक्ति को कहा  लो इसे फेक दो उस वयक्ति ने सोचा कि अभी तो बड़े ध्यान से पढ़ रहे थे अब फेकने को कह रहे है तो सोचा देखु क्या लिखा है तो देखा गाली उसे बडा गुस्सा आया है उसने कहा बापू आप इन गलियो को ध्यान से पढ़ रहे थे तो बापू ने बड़े धीरे से कहा नही मै तो अपने मतलब कि चीज ढूढ रहा तो उसने कहा इसमे आपके मतलब का क्या है तो कहा मेरे मतलब कि ये पिन थी जो मैने निकाल ली । 

तो कहने का अर्थ सभी से कुछ अच्छा  सीखे बडों से तो सीखे ही छोटों से भी सीखे । 
                             जय श्री राधे 

मंगलवार, 25 दिसंबर 2018

मित्रता कैसी हो

मित्रता कैसी हो :-


                       मित्रता कृष्ण और सुदामा जी कें जैसी हो ये मित्रता का सबसे आदर्श और ऊँचा उदाहरण है ।
और आज भी हर जगह इस मित्रता का उदाहरण दिया जाता है । 
तो ऐसा क्या था सुदामा जी की मित्रता मे । तो वो है निस्वार्थ प्रेम देखिए आज कल युवा कहते जरूर है , की ये मेरा बेस्ट फ्रेंड ( best friend ) लेकिन मन मे उनके कैसा भाव है , वो वही जानते है , आज कल की मित्रता धन , स्वार्थ पर टिकी है । 
क्षमा करे मित्रता नही फ्रेंडशिप( friendship ) क्यो कि फ्रेंड वही है जो केवल हमारे धन और तन को देखकर या स्वार्थ से बनते है । 
लेकिन फिर वही बात और  फिर वही उदाहरण मित्रता हो तो सुदामा जी की तरह उस मित्रता मे स्वार्थ नही धन की कोई बात नही केवल निःस्वार्थ प्रेम । 
सुदामा जी जब प्रभु श्री कृष्ण के पास द्वारिका पहुचे तो कृष्ण जी ने ये नही सोचा की हम यहा के राजा है और लोग क्या कहेगे सुदामा जी को गले से लगाया और साथ ही साथ अपने सिंघासन मे बिठाया खुद चरणो मे बैठ गए और चरण पखारे । 

अब आप लोग सोच रहे होगे की हम भी ऐसा करे क्या नही हम ऐसा बिल्कुल नही कहेगे प्रभु के वो मित्र भी थे और ब्राह्मण भी इसलिए प्रभु ने उनके चरण पखारे । लेकिन आज कल हम समझते है मित्रता मे जाति नही देखी जाती ठीक है लेकिन एक भजनन्दी ब्राह्मण वास्तविकता मे पूजनीय है चाहे वो मित्र हो या हमसे उम्र मे छोटा ब्राह्मण हो । 
लेकिन कहने का आशय सिर्फ इतना है आप हम सभी का सच्चा मित्र अगर कोई है , तो केवल प्रभु श्री कृष्ण है और कोई नही जो हर समय आपका साथ देते है,  इसलिए सभी से प्रेम से बात करे फ्रेंड किसी को भी बनाए  लेकिन मित्र तो अपने गोपाल जी को ही बनाए ।          जय श्री राधे 

रविवार, 23 दिसंबर 2018

तिलक क्यो लगाना चाहिए

तिलक क्यो लगाना चाहिए :-

                               हमारे सनातन धर्म मे तिलक का बहुत महत्व है , चाहे वो किसी भी सम्प्रदाय का हो अगर वो वैष्णव है तो ऊर्ध्वपुण्ड्र शैव है अर्थात भोलेनाथ का भक्त है तो त्रिपुण्ड्र और शाक्य है अर्थात देवी माँ का भक्त है तो छोटी सी बिंदु रोली की 

कहने का अर्थ तिलक हर वयक्ति कें लिए बहुत महत्वपूर्ण है , तिलक लगाने कें अनेको फायदे आपने सुने होगे लेकिन फिर भी लोग तिलक न लगाना फैशन समझते है जब की तिलक लगाने वाले कें मुख की सुंदरता तो अलग होती है । 



तिलक लगाने से वयक्ति कें विचार अच्छे होते है तिलक लगाने से वयक्ति का मस्तिष्क तेज होता है । 
हम भारतीय अपने तिलक कें महत्व को भूल गए वही विदेश मे आज लोग तिलक कें महत्व को जानकर तिलक लगाते है । 



इसलिए तिलक हर हिन्दू की शान है , तिलक लगाना हर सनातन धर्म वाले की पहचान है । 


इसलिए बड़े ही नही बल्कि बच्चों को भी तिलक लगवाए भले ही रोली का छोटा सा बिंदु लेकिन तिलक अवश्य लगाए अभी बहुत विस्तार से तिलक की महिमा नही आगे आने वाले ब्लॉक पर फिर चर्चा होगी । 


                 जय श्री राधे 

शुक्रवार, 21 दिसंबर 2018

गौ माता की सेवा बड़ी लाभकारी है ।

गौ माता की सेवा बड़ी लाभकारी है -:

                                          जैसा कि आप सभी जानते है की गौ माता की सेवा से बड़ा लाभ है , अच्छा मैने ये लाभ शब्द का प्रयोग इसलिए किया क्यो की आज का वयक्ति बिना लाभ कें तो किसी से बात करना भी नही पसंद करता । 
 



                   


  गौ माता की महिमा हमारे शास्त्रों मे भी गायी गयी है , और हमारे बालकृष्ण लाल ने गौ माता की कितनी सेवा की वो सभी जानते है । 
                            जब कन्हैया ने माँ यशोदा से पहली बार गोचा रण कें लिए कहा तो मईया ने कहा लाला तेरे पाव बड़े कोमल है पादुकाएं तो पहन ले । 
       कन्हैया ने कहा अगर मेरी सभी गइया मईया को पादुकाएं पहनाओ तो मै भी पहनू वरना नही और कन्हैया नंगे पाव गैया मईया कें साथ जाते । 
           लेकिन आज लोग मंदिरो मे तो एक किलो लड्डू का भोग लगा देगे लेकिन गऊ माता कें लिए एक रोटी भी नही निकालते । 

और तो और ठंड कें मौसम मे गऊ माता सड़को पे रात - रात भर घूमती रहती है , और हम सभी दूध तो बड़े आराम से पी लेते है लेकिन गऊ माँ कें बारे मे कभी नही सोचते की उन्हे कितना कष्ट हमारे द्वारा मिल रहा है । 

इसलिए आप सभी से एक ही बात कहेगे की गऊ माँ की सेवा ह्रदय से करे वो आपकी हर अच्छी मनोकामना पूरी करेगी और सिर्फ मनोकामना पूरी करने कें लिए नही बल्कि वो हमारी माँ है इस भाव से सेवा करे । 


              जय श्री राधे 

गुरुवार, 20 दिसंबर 2018

विनम्रता से जीत

विनम्रता से जीत :-

                                  विनम्रता एक ऐसा गुण है , जिससे दुश्मन भी दोस्त बन जाते है । 
                                  जब हम किसी से विनम्र होकर बाते करते है तो सामने वाले कें भाव ही बदल जाते है , अगर वो आपका काम नही भी करना चाहता था तो करने का मन बना लेता है । 
उसके मन मे यही बात आती है की कितना सज्जन वयक्ति है । 

आज कल कुछ ही लोगो कें अंदर ये वास्तविकता मे गुण बचा है , और बाकी जो है वो केवल स्वार्थ कें लिए घर मे भले ही ऐसे बात करेगे कि मानो बाण सीने कें आर पार हो जाये । 

और जब बाहर लोगो से बात करेगे तो लगेगा बस गरमा गर्म चाशनी मे डूबी हुई जलेबियाँ परोसी जा रही हो । 

लेकिन   कभी कभी ये जलेबियाँ घर मे भी परोसी जाये तो और भी आनंद आएगा और वास्तविकता मे आप विनम्र बन पाऐगे । 

इसलिए इस गुण को अवश्य धारण करने कि कोशिश करे । 

          जय श्री राधे